जाति आधारित जनगणना उचित है या अनुचित यह बडा गम्भीर मसला है । एक ओर तो इसकी गणना से यह मालूम हो जाएगा कि कितने प्रतिशत लोग जीवन यापन दर्जे से नीचे स्तर का जीवन जी रहे है उसमे किस जाति के लोग शामिल है । जिसके आधार पर सरकार उनके स्तर को उठाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाए चालू कर सकती है । निःसन्देह राजनीतिक लोग इस आकडे का गलत फायदा उठाने की कोशिश करेगे । किन्तु यह भी सत्य सामने आना चाहिए कि आरक्षित वर्ग का फायदा उठाने वाले लोग वास्तव मे क्या आरक्षण के हकदार है कि नही । यह माग काफी समय से उठ रही है कि आरक्षण का आधार जाति न होकर आर्थिक स्तर हो । जनगणना से यह मालूम पड जाएगा कि आर्थिक रूप से कई आरक्षित जातियाॅउच्च स्तरीय जीवन जी रही है और कई सामान्य वर्ग के लोग निम्न स्तर का जीवन जी रहे है । इस तरह उनके आरक्षण की माग समाप्त करने की माॅग उठेगी तो नेता लोग अपनी राजनीति कहाॅ से करेगे
दूसरा पहलू यह भी है कि यदि जाति आधारित जनगणना हुयी तो प्रत्येक जाति के प्रतिनिधि शासन मे अपनी जाति के आधार पर उनकी नुमाइन्दगी की माॅग करेगे । इससे लोगो मे वैमन्स्य की भावना उत्पन्न होगी । जो देश की एकता के लिए शुभ नही है । इतना शोर शराबा क्यो । जनगणना तो इससे पूर्व मे भी हो चुकी है तब भी फार्म मे नाम उम्र जाति भरी जाती थी तब इतना शोर नही हुआ । यह शोर इसलिए हो रहा है कि जनगणना पूर्ण होने के बाद जातिगत आधार पर उसका विश्लेषण किया जाएगा कि पूरे देश की जनसंख्या मे कितने लोग हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख , ईसाई है । अब अगर हिन्दू को बाॅटेगे तो कितने प्रतिशत ब्राहम्ण, क्षत्रिय , वैश्य ,यादव, आदि ...2 बाॅटेगे । जिस तरह हिन्दुओ मे बॅटवारा है उसी तरह मुस्लिमो मे भी बटवारा है सुन्नी शिया । सिक्खो मे भी बटवारा है कुछ आपने को दूसरे से उच्च कुलीन वर्ग का मानते है । भारत एक विभिन्न प्रकार की जातियो का देश है । जाति का मतलब केवल ब्राहम्ण यादव वेैश्य क्षत्रिय ही नही है । शासन कहॅा तक कितने प्रकार के आॅकडे एकत्र करना चाहता है । कहीं ये आॅकडे मजाक न बन जाए और लोग आॅकडो के आधार पर बुलाए जाए जैसे अरे 25 प्रतिशत फलाने 15 प्रतिशत आदि । शासन को चाहिए कि इन आॅकडो का सही प्रकार से निर्धारण हो और इन आॅकडो का कोई भी दुरूप्रयोग न हो । जाति के साथ साथ उनकी आर्थिक स्थित का भी निर्धारण किया जाए । जनता को भी चाहिए की वो सब सूचनाए सही सही दे जिससे सरकार को योजनाए बनाने मे सुविधा हो । अब जातिगत जनगणना हो कि नही इसका निर्णय समाज के प्रबुद्ध वर्ग को लेना चाहिए साथ ही साथ समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री से भी राय ली जानी चाहिए ।
World Environment Day: Trees are the lungs of the Earth; Plantation is
essential for Environmental Conservation– Krishna Kumar Yadav
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Environmental conservation is the greatest need of the present time. To
ensure that future generations receive pure oxygen for survival, more and
more tr...
1 दिन पहले
